Manoj Kumar Real Journalism with Traditional Values
Our Vision is Real and Indepth Latest Updates with Breaking News with Citizens of India 
चुनावी सरगर्मियों में लोभ लालच का दौर
आपके अनुसार इस लेख को पहली बार वोट दें 0 comments 25715Visits Manoj Kumar

अपने मताधिकार का उपयोग अवश्य करें

1 Photo

सम्पूर्ण भारत में हो रहे आम चुनावों के लिए होने वाले मतदान के दिन जैसे जैसे नजदीक आ रहे हैं चुनावी पार्टियां अपने अपने पैतरों लो लगातार फैंकने में लगी हुयी दिखाई दे रही है | नेता अपने इतिहास को बरकरार रखे हुये अपने अपने रंग दिखाकर पार्टियां बदलने में व्यस्त हैं |

उक्त दोनों ही बाते एक दूसरी की पूरक हैं | और इन्ही पूरक बातों से समझ आता है कि भारत के नेता और भारत की राजनेतिक पार्टियां दोनों ही किस तरह से रंग बदलने में माहिर हैं | जिसको जहाँ से मौक़ा मिला उसने वही से हमला किया | लोभ दिया लालच दिया पद का आश्वाशन दिया किसी को टिकट दिया तो किसी को धोका दिया | बस यही बचा रह गया है भारतीय राजनीती में | आम जनता के भरोसे और विशवास से मिलने वाले वोट से ज़िंदा रहने वाली ये मौक़ा परास्त पार्टियां इस २०१४ के आम चुनाव में अपनाई जा रही रणनीति के तहत आम जनता को ही भूल गयी हैं | अब नेता बनना है तो केवल पैसा चैहिये आम जनता से अब कोई लेना देना नहीं है |

देश में जगह जगह रैलियां आयोजित की जा रही हैं | जनता के बीच बड़े बड़े नेता लगातार जा जा कर बड़े बड़े वायदे कर रहे हैं | कोई पिछली सरकारों की असफलताएं गिना रहा है तो कोई अपने द्वारा किये गए कामो के दावे कर रहा है | आम चुनाव की सूत्रधार आम जनता तो अभी बहुत दूर है पार्टियों के दिग्गज लगातार एक दुसरे को मनाने के लिए जी जान जुटाकर लगे हुये हैं | राजनेतिक समीकरणों को सेट किया जा कर जीत के दावे और प्रधानमंत्री पद की कुर्सी ही राजनेतिक पार्टियों और नेताओं के प्रमुख उद्देश्य बन चुके हैं | किसी भी कीमत पर कुर्सी हासिल करना ही इनका मकसद है | इस बीच पीछे छूट गयी है तो भारत की जनता | किसी भी पार्टी का नेता हो लेकिन वो किसी भी कीमत पर देश में हो रही विभिन्न घटना परिघटनाओं की निजी या सार्वजानिक तौर पर जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं | सभी के पास आरोप और समस्याओं की लम्बी लिस्टें तो हैं लेकिन समाधान के नाम पर एक लव्ज तक कोई कहने या सुनने को तैयार नहीं है | भारत में हो रहे आम चुनावों में लगातार आम जनता के साथ धोखे और छलावे की अति देखने को मिल रही है | ना कोई पक्की योजना ना ही कोई सुदृढ़ परिणाम |


अब देखना यह है कि भारत की आम जनता किन मुद्दों को लेकर किस प्रकार अपने अपने क्षेत्र में अपने अपने नेताओं का चुनाव करती हैं | क्या किसी पार्टी को जनता चुनती है या मुद्दों को लेकर नेताओं से सवाल करती हुये भारत की त्रिशंकू संसद की नीव रखती है | यदि आज भी भारत में किसी बड़े बदलाव की नीव नहीं रखी जाती है तो यह निश्चित है के देश एक बार फिर से अनिश्चितताओं के दौर में चला जायेगा | किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा और हालत दिल्ली विधान सभा की भाँती होगी |

| More

Your Comments

0 comments

Discussions

 
Press Ctrl+G To Change Between Hindi and English
Your Name :  
Email Address :  
Your Comment :  

Breaking News