लोकसभा चुनाव 2014 - यूथ फिर क्यों चले बूथ ?
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युवा वर्ग तय करेगा देश का भविष्य ..

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आने वाले लोकसभा चुनावों में जगह जगह चुनाव आयोग द्वारा मतदान के प्रति जागरूकता के लिए लगवाये पोस्टर और बेनर " यूथ फिर चला बूथ " इस बार युवाओं को एक और जहाँ मतदान के प्रति के आकर्षित कर रहे है तो साथ ही उनके दिमाग में एक सवाल भी उत्पन्न कर रहे है कि जब विभिन्न सत्तारूढ़ पार्टियों द्वारा युवाओं से पिछले लम्बे समय से किये जाते रहे वादे कभी पूरे हुए तो कभी उम्मीद सिर्फ उम्मीद ही रह गयी तो यूथ क्यों जाये बूथ ?. देश का बौद्धिक वर्ग कहता है कि देश कि बागडोर सिर्फ युवा के हाथ में है . युवा वो है जो देश का भविष्य बदल सकता है और यही कुछ कारण ऐसे रहे कि देश कि प्रमुख पार्टियों ने युवाओं को पानी पार्टियों में मुख्य पद देना शुरू किया राजनीति में युवाओं को अधिक से अधिक जोड़ने के लिए विभिन्न प्रयास हर स्तर पर पार्टियां करती हुई नजर आयी.

बाबजूद इसके युवाओं में अधिकतर युवा राजनीती से सरोकार करना पसंद नहीं करते उनका मानना है कि राजनीती एक वो गन्दा दलदल है जिसमे फसना अपनी जिंदगी को फ़साना जैसा है वही आजकल राजनीती का बदलता रंग व ढंग भी युवाओं को कही न कही राजनीती जैसे क्षेत्र से दूर करने लगा है स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक हुए हर सामाजिक अंदोनों में युवाओ कि महत्वपूर्ण भूमिका को हैम सभी देखते आ रहे है बाबजूद इसके युवा राजनीति को एक कॅरिअर कि तरह क्यों नहीं ले रहा है यह एक विचारणीय बिंदु है

इस पूरे मुद्दे पर जब भारतकेसरी कि टीम ने युवाओं से बात की तो उन्होंने कहा कि सत्ता में पार्टी कोई भी आये वो वोट ये सोचकर देंगे कि उनके आने भविष्य और वर्त्तमान में कौन अहम् भूमिका निभा सकता है वही बी ए में पढ़ने वाली एक छात्रा आकांक्षा ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा चलाये जा रे मतदाता जागरूकता अभियान ने उन्हें मतदान के प्रति जागरूक जरुर किया है परन्तु चुनाव आयोग यह भी बताये कि जब सत्तारूढ़ पार्टियां यूथ पर लाठियां बरसाती है , उनकी समस्याओं को नहीं सुनती , उनसे किये हुए वादे पूरे नहीं करती तो ऐसे में वो क्यों बूथ जाये ?

गौरतलब है कि हाल ही हुए देश के पञ्च राज्यों में विधासभा चुनावों में मतदान का प्रतिशत में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज कि गयी थी वही चुनाव आयोग द्वारा किये गए विश्लेषण में युवाओं व महिलायों कि भागीदारी सर्वाधिक रही तो भाजपा जैसी पार्टियों में युवाओं कि इस भागीदारी को "मोदी कि लहर" कि सफलता करार दिया तो कोंग्रेस ने "राहुल फेकटर"

परन्तु वास्तविकता ये है कि आज का युवा त्रस्त चुका है राजनितिक दलों के गिरते स्तर से , रोजगार देने के नाम पर किये जाने वाले शोषण से , बेरोजगारी कि मार से , शिक्षा के तिरस्कार से , भर्ष्टाचारों के गलियारों से, झूठे वादों से ,
ऐसे यदि हम यह कहे कि अब युवाओं को तलाश है तो ऐसी सरकार कि जो यदि उनके वोट से सत्ता में ए उनकी समस्याओ को सुने भी तानाशाही कि जगह लोकतत्र का सम्मान हो , युवाओं के लिए जगह हो और उनका सम्मान हो तभी ये देश समृद्धि कि दिशा में आगे बढ़ पायेगा

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