अजमेर में भी हिलने लगा सचिन का पायदान
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चर्चा अजमेर-ए-बाजार से ....

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अजमेर | राजस्थान लोकसभा चुनावों में एक और जहाँ भाजपा मिशन-२५ कि कल्पना को साकार करने में लगी हुई है वही दूसरी और कोंग्रेस भी अपने कुछ ब्रांड प्रत्याशियों के बल पर भाजपा के मिशन - २५ के सपने को सिर्फ सपना रखने कि रणनीति पर कार्य कर रही है पंरतु कोंग्रेस कि ये राजनितिक रणनीति कितना अपना असर इन चुनावों में दिखा पायेगी यह तो आने वाले समय में जनता ही तय करेगी वही यदि बात करे राजस्थान कि कुछ चुनिंदा लोकसभा सीटों कि अजमेर , जयपुर ग्रामीण ,अलवर, सवाई माधोपुर जैसी सीटों का दिमाग में आता है जहाँ काफी रोचक मुकलबला इस बार लोकतंत्र को देखने को मिलेगा

बात करे यदि अजमेर लोकसभा सीट कि तो यहाँ से कोंग्रेस के जाने माने युवा चेहरे सचिन पायलेट एक बार फिर मैदान में है विश्वस्त सूत्रो कि माने तो निश्चित तौर पर सचिन कि क्षेत्रीय छवि पर कोई सवालिया निशान नहीं लगाया जा सकता परन्तु इस बार उन्हें कोंग्रेस सरकार के घोटालों व जनता का कोंग्रेस के प्रति नकारात्मक सोच का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है यहाँ मुकालबा इतना कड़ा है कि भविष्य कि सम्भावनाओं का अंदाजा लगाना भी अभी उचित नही रहेगा वही भाजपा ने भी सचिन के सामने जाट नेता या यूं कहे कि भाजपा के दबंग नेता सांवरलाल जाट को मैदान में उतारा है .यदि सांवरलाल जाट कि व्यक्तिगत छवि पर नजर डाले तो जनता के सामने एक दबंग नेता कि तस्वीर उभर कर आती है . फिलहाल में सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री के पद पर होना व प्रदेश में भाजपा सरकार के साथ देश में मोदी कि लहर भी अजमेर में सांवरलाल जाट को विजय कि उम्मीद दिला सकता है

वही यदि बात करे जातीय समीकरणों कि तो तस्वीर बहुत साफ़ नजर आती है
अजमेर एक ऐसी धार्मिक नगरी है जहाँ सभी जातीय वर्गों का बाहुल्य नजर आता है फिर वो मुस्लिम समुदाय से लेकर सिंधी , जैन , गुर्जर ,जाट तक देखा जा सकता है साथ ही मुख्यतया इन्ही जातियों के लोग किसी भी प्रत्याशी कि जीत हार को तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे है
पंरतु अब सवाल यह है कि इस बार का चुनाव इस क्षेत्र विकासवादी होगा या जातिवादी या पार्टीवादी .....
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