मंगलवार, 7 सितम्बर, 2010
शीतल पेय पदार्थों की बोतलों में मिले मांस के लोथडे़
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 शीतल पेय पदार्थों की बोतलों में मिले मांस के लोथडे़
अधिवक्ता ने भेजा कंपनी को नोटिस मैनपुरी(उत्तर प्रदेश)। खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर कई बार नामी-गिरामी कंपनियां कटघरे में आ चुकी हैं। जनपदीय इतिहास में पहली बार एक नामी कंपनी द्वारा तैयार पेय पदार्थ की कई बोतलों में मिले मांस के टुकडों और अवशिष्ट पदार्थों की मात्रा से विचलित अधिवक्ता ने कंपनी को जिला न्यायालय में तलब कराने का मन बनाया है। कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर, निर्माता और विक्रेता को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है।

उल्लेखनीय है कि अब से कुछ समय पहले पेय पदार्थों में मिलावट कर कंपनियों ने प्रचार का नया तरीका खोजा था। समय बीतने के साथ प्रचार का यह तरीका मिलावटखोरों के लिए कमाई का जरिया बनता जा रहा है; पेय पदार्थ में मिलावट का नया मामला थाना क्षेत्र किशनी में सामने आया है। यहां के सदर बाजार निवासी होरीलाल पुत्र विधिदास, लाल शिवेंद्र पुत्र माधो सिंह और ग्राम जिजई निवासी जगदीश पुत्र रामसनेही लाल ने नगर के दुकानदार दुर्गा ट्रेडर्स के स्वामी रामबाबू सविता के यहां से थम्स अप की बोतलें खरीदी थीं। इन तीनों व्यक्तियों द्वारा खरीदी गई बोतलों में से एक बोतल में मांस का लोथड़ा, दूसरी में पान मसाला का पाउच और तीसरी में चर्बी भरी हुई थी। पेय पदार्थ की बोतलों में गंदगी की शिकायत पर दुकानदार ने इन्हें दूसरी बोतल देने की बात की लेकिन इन तीनों ग्राहकों द्वारा पेय पदार्थ विक्रेता के ,िखलाफ शिकायत दर्ज करने का मन बना लिया और तीनों ने अधिवक्ता शैलेंद्र यादव के माध्यम से उपभोक्ता फोरम में केस दर्ज कराया। अधिवक्ता यादव ने बताया कि इस सबंध में किशनी के दुर्गा टेªडर्स, इटावा की फर्म और आगरा की फर्म को 15 जुलाई को 80 सीपीसी का नोटिस रजिस्टर्ड डाक से भेजा गया है। अधिवक्ता के द्वारा महामाया नगर के नगला उम्मेद में वृंदावन एग्रो इंडस्ट्रीज प्रा0 लि0 को भी नोटिस भेजा गया है। नियत तिथि पर यदि इन जगहों से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आता है तो इनके खिलाफ उपभोक्ता फोरम और न्यायालय में मुकदमा दायर कर कटघरे में भी घसीटा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेशों में सख्त हिदायत देते हुए कहा था कि पेय पदार्थों और खाद्य सामग्री को बाजार में बेचने वालों को उसमें मिलाए जाने वाले पदार्थों की मात्रा को सामग्री की बोतल के ऊपर दर्शाना होगा ताकि ग्राहकों को पता चल सके कि वे क्या खा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ताक पर रखकर मिलावट खोरों द्वारा न तो बोतलों के ऊपर मानक दर्शाए जा रहे हैं और न ही बैच नंबर लिखे जा रहे हैं। पेय पदार्थ या खाद्य सामग्री को बोतलों में कब पैक किया गया और उनकी एक्सपायरी डेट क्या है, इस बात का भी विवरण कंपनियों द्वारा नहीं दिया जा रहा है।

मैनपुरी से वीरभान सिंह
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