कीचड़ से सनी है दलितों की बस्तियां
विकास कार्यों के नाम पर हो रही खानापूर्ति
मैनपुरी(उत्तर प्रदेश)। जनपद में अंबेडकर ग्रामों की दुर्दशा पर न तो शासन के नुमाइन्दों का ध्यान जाता है और न ही प्रशासन के कर्णधारों का। अंबेडकर ग्राम के नाम पर मिलने वाली सुख-सुविधाओं से वंचित सैकड़ों ग्रामीण रोजाना कलक्टेªट पर अधिकारियों की चैखट चूमते दिखाई देते हैं। ऐसे ही एक गांव में अब तक किसी भी सरकारी योजना के क्रियान्वयन न होने की दुहाई देते हुए दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर योजनाओं का लाभ दिलाए जाने की मांग की।
तहसील क्षेत्र भोगांव का ग्राम मेरापुर छदामी कहने को तो एक अंबेडकर गांव है लेकिन एक अंबेडकर में होेने वाली सुविधाएं आज तक इस गांव में नहीं पहुंचीं। नंगे पांव कलक्टेªट पहुंचे ग्रामीणों ने यहां प्रदर्शन कर अपनी आवाज उठाई। ग्रामीण सुभाश चन्द्र जाटव, अखिलेश जाटव, रामकिशन जाटव, खुशीराम जाटव, जोरावर शाक्य, हरीसिंह ठाकुर, लालमन जाटव, रामनरेश जाटव, राजवीर जाटव, योगेन्द्र कुमार जाटव, रमाशंकर जाटव , दलवीर जाटव सहित दर्जनों दलित ग्रामीणों ने बताया कि शासन द्वारा चलाई जा रही कोई भी सरकारी योजना गांव के गरीबों तक पहुंची ही नहीं। महामाया आर्थिक मदद योजना के अंतर्गत लेखपाल व अन्य राजस्व अधिकारियों द्वारा सर्वे तो किया गया लेकिन उस सर्वे की आड़ में अपात्रों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। मनरेगा जैसी राष्ट्रीय योजना अधिकारियों की दलाली की भेंट चढ़ रही है। कहने को तो कागजों पर सारा कार्य मनरेगा के तहत मजदूरों से ही कराया जा रहा है लेकिन हकीकत में गांव वालों को कोई काम दिया ही नहीं गया। मनरेगा के तहत काम मिलना तो दूर की बात, गांव के विकास पर भी किसी प्रकार का ध्यान नहीं दिया गया। अब हालात यह हैं कि बरसात का पानी गांव की कच्ची गलियों में भर रहा है। गांव की आबादी में रह रही बूढ़ी महिलाएं और बच्चे कीचड़ भरे रास्तों से उस पार जाने को मजबूर हैं। मनरेगा के तहत बनाए गए गरीबों के नाम पर सारे कार्ड ग्राम प्रधान ने अपने पास रख लिए हैं। उन कार्डों पर पात्रों का नाम दर्शाकर लाभ अपात्रों को पहुंचाया जा रहा है। बिचैलिए मलाई खा रहे हैं और गरीब रोटी को भी मोहताज हैं। अपनी समस्याओं का दुखड़ा रो रहे ग्रामीणों ने अपर जिलाधिकारी शेषनाथ से उम्मीदें जताते हुए विकास कार्य कराने की गुहार लगाई है।