आठ वर्ष पूर्व पत्नी सहित पांच बच्चों को उतारा था मौत के घाट
फास्ट टैªक कोर्ट ने सुनाई थी मौत की सजा
मैनपुरी(उत्तर प्रदेश)। करीब 8 वर्ष पूर्व कथित चरित्रहीनता और बेरोजगारी से तंग आकर पत्नी सहित पांच बच्चों को जिंदा जलाकर मार डालने वाले हत्यारे को फास्ट टैªक कोर्ट द्वारा मिली फांसी को सजा को हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आजीवन कारावास में तब्दील करने का फैसला सुनाया गया है।
बताते चलें कि मैनपुरी शहर के मोहल्ला बंशीगौहरा दक्षिणी छपट्टी निवासी दयाराम कुम्हार का पुत्र येागेश कुमार बेरोजगारी से तो तंग था ही, साथ ही वह अपनी पत्नी के चरित्र पर भी शक करता था। इस बात को लेकर दंपत्ति में आए दिन झगड़ होता रहता था। 20/21 नवम्बर 2002 की रात जब परिवार के सभी सदस्य गहरी नींद में सो रहे थे तभी योगेश कुमार ने अपनी पत्नी रानी, 14 वर्षीय पुत्र शिशुपाल, 8 वर्षीय पुत्री सुमन, 6 वर्षीय सविता, 4 वर्षीय लल्ला और दो माह के छोटे लल्ला पर मिट्टी का तेल डालकर जिंदा आग के हवाले कर दिया था। इस वीभत्स घटना में पुत्री सविता औश्र योगेश घायल हुए थे जबकि रानी, शिशुपाल, सुमन और छोटे-बडे़ लल्ला की मौके पर ही जिंदा जल जाने से मौत हो गई थी। पुत्री सविता ने 23 नवम्बर 2002 को उपचार के दौरान जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया था। तत्कालीन कोतवाली प्रभारी एमए काजी ने शिवदान पुत्र रामरतन निवासी दक्षिणी छपट्टी की तहरीर पर धारा 302, 436 के तहत अभियोग पंजीकृत कर लिया। दौरान-ए-विवेचना घटना के पीछे जब योगेश के नाम का खुलासा हुआ तो पुलिस ने उसे अस्पताल से उठाकर पूछताछ की। योगेश ने पुलिस के सामने सच स्वीकरते हुए अपनी पत्नी और बच्चों को जिंदा जलाकर मारने की बात कबूल कर ली। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया। 8 अगस्त 2008 को फास्ट ट्रैक कोर्ट तृतीय के न्यायाधीश प्रेमनाथ ने इस दिल दहलाने वाले हत्याकाण्ड में योगेश पुत्र दयाराम कुम्हार को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। सजा मिलने के बाद योगेश को केन्द्रीय कारागार फतेहगढ़ में रखा गया था। यहां से उसने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में फांसी की सजा पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर की। उसकी याचिका पर न्यायमूर्ति इम्तियाज मुर्तजा एवं काशीनाथ पांडेय की पीठ ने फास्ट टैªक न्यायाधीश मैनपुरी को फांसी की सजा पर पुनर्विचार करने के निर्देश 11 दिसम्बर 2009 को दिए। फास्ट टैªक कोर्ट तृतीय के न्यायाधीश चन्द्रपाल सिंह ने याचिका पर पुनर्विचार करते हुए फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया है।
मैनपुरी से वीरभान सिंह