फर्जी मुंशियों ने समेटे अपने बस्ते
मैनपुरी(उत्तर प्रदेश)। कहते हैं कि जब आग लगती है तो सबसे पहले चूहे भागते हैं। जिला प्रशासन के कुछ अधिकारियों का भी यही हाल है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता की आवाजें जब-जब जोर पकड़ती हैं तब-तब अधिकारियों द्वारा खानापूर्ति के नाम पर तत्परता दिखाते हुए जनता के दिलों में जगह बनाने का प्रयास किया जाता है। सदर तहसील में नायब तहसीलदार द्वारा मीडिया को सूचना देने के बाद मारा गया छापा भी इसी कड़ी का एक हिस्सा था।
बताते चलें कि सदर तहसील मैनपुरी पर रोजाना सैकड़ों फरियादियों का आना जाना लगा रहता है। ज्यादातर समस्याएं जमीन और प्रमाण पत्रों से संबंधित होती हैं। इस तहसील परिसर में सैकड़ों की संख्या में स्टाम्प वेंडर, मुंशी, अर्जी नवीस और तरह-तरह के लोग बैठे मिलते है लेकिन वास्तव में रजिस्टर्ड कौन है पता लगा पाना जरा मुश्किल होता है क्योंकि हर कोई सीधे अधिकारियों से काम कराने का माद्दा रखता है। अब भला कोई कैसे न फंसे? लंबे समय से यही दलाल और बिचैलिए गांव के भोले-भाले गरीबों और शहर के छात्र-छात्राओं से काम कराने के नाम पर बडे़ पैमाने पर सुविधा शुल्क की मांग करते रहे हैं। कई बार इनके खिलाफ आवाज भी उठाई गई लेकिन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की काली कमाई का एक जरिया बन चुके इन दलालों पर कार्रवाई करने से तहसील के अधिकारी भी हिचकते हैं।
रजिस्टर्ड मुंशियों द्वारा की गई शिकायत पर कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार रोहिताश कुमार ने अपने अधीनस्थों के साथ तहसील परिसर के बस्तों का निरीक्षण किया। निरीक्षण होते देख फर्जी रूप से बैठे लोग अपने बस्ते समेटते हुए खिसकने लगे। नायब तहसीलदार ने मुंशियों और स्टाम्प वेंडरों से लाइसेंसों की मांग की। अधिकांश लोगों द्वारा बहानेबाजी करने पर नायब तहसीलदार रोहिताश कुमार ने नायब नाजिर रनवीर सिंह तोमर को ऐसे सभी लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही उन लोगेां के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने को कहा जो अपने लाइसेंसों पर दूसरे लोगों को ठेकों पर बस्ते उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने सभी रजिस्टर्ड मुंशियों को अपने नाम की मुहर बनवाने तथा प्रार्थना पत्रों पर उन मुहरों को लगाने की हिदायत भी दी।