रेत के दाम सीमेन्ट और लोहा से भी अधिक हो जाने के कारण अब गरीब नहीं बना सकते अपना आशियाना, सिर्फ देख सकते हैं मुंगेरी लाल के हसीन सपने और सपनों में होगा उनका आशियाना----------------- छतरपुर(रवि गुप्ता)। शिवराज सरकार में माफियाओं को लगातार बढावा दिया जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण है खनिज माफियाओं का बुन्देलखण्ड में एकाधिकार दे देना। खनिज विभाग की विवादित पालिसी के चलते रेत के कारोबार में माफियाराज को बढ़ावा मिल रहा है। मध्य्रपदेश स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन के माध्यम से कराए गए टेंडर से बुन्देलखण्ड में एक एक जिला एक एक ठेकेदार के हवाले कर दिया गया है। जिससे न केवल माफियाराज को बढ़ावा मिला है बल्कि रेत माफिया विभाग और शासन से ऊपर हो गए है। एक ठेकेदार के भरोसे चल रहे रेत के कारोबार का हाल यह हो गया है कि एक स्थान से छतरपुर और टीकमगढ़ जिले का रेत कारोबार संचालित हो रहा है। ऐसे मे बिचैलिए पैदा हो जाने से रेत के दाम सीमेंट और लोहा से अधिक हो गए है। इस प्रक्रिया से छोटे छोटे रेत ठेकेदार अब बेरोजगार हो गये है।
मामले के बारे में मीडिया ने समझा तो पाया कि खनिज विभाग ने रेत की छोटी बढ़ी खदानों को एकसाथ देने के चक्कर में खदानवार नीलामी न करके जिलावार नीलामी कर दी है। इसके टेंडर भोपाल मे मप्र राज्य खनिज निगम द्वारा कराए गए। पूरे टीकमगढ़ जिले की खदानों का एक टेंडर होने धरोहर राशि करोड़ों रूपए होने तथा नियमों के फेर में छोटे ठेकेदार इस कारोबार से बाहर हो गए। ऐसे में पूरे टीकमगढ़ जिला तथा छतरपुर जिला की धसान नदी की सभी रेत खदानें उत्तरप्रदेश के एक ठेकेदार द्वारा ले ली गई जबकि छतरपुर जिले की अन्य खदानों को उसने नहीं लिया जिससे यहां मजबूर होकर प्रशासन को अलग अलग ठेकेदारों को खदानें देना पड़ीं। पडोसी जिले टीकमगढ़ में उत्तरप्रदेश के एक ठेकेदार को एकाधिकार होने के कारण छतरपुर जिले की खदानों पर उसका असर हुआ है। इस ठेकेदार के पास जिले की धसान नदीी की खदानें होने के कारण उसने टीकमगढ़ के समान ऊंची दामों पर मिलने से जिले के अन्य ठेकेदारों ने भी रेत के भाव मे बढ़ोत्तरी कर दी है।
जानकारी के अनुसार उत्तरप्रदेश के ठेकेदार द्वारा छतरपुर और टीकमगढ़ जिलों की खदानों को संचालित करने कके लिये पलेरा जिला टीकमगढ़ में अपना कार्यालय बनाकर रखे हुये है। एक आफिस से पूरे टीकमगढ़ तथा छतरपुर जिले की लगभग डेढ़ दर्जन खदानों को संचालित किया जा रहा है। जो कि किसी भी हालत मे संभव नहीं है। जैसे कि पृथ्वीपुर जिला टीकमगढ़ की किसी रेत खदान से रेत भरने के लिए पहले ट्रक चालक पलेरा जिला टीकमगढ़ आकर पिटपास ले इसके बाद वह पृथ्वीपुर की किसी रेत खदान से रेत भरने के लिए जाये। यह कैसे संभव हो सकता है। ऐसे में रेत माफिया द्वारा पेटी कांट्रेक्टर को अलग अलग खदाने दे दी गई है। वहीं इस ठेकेदार ने टीकमगढ़ जिले की 36 खदानों को छोड़ दिया जिससे इन खदानों से कहने को तो उत्खनन बंद है लेकिन ठेकेदार द्वारा अपनी खदानों की अपेक्षा इन्ही छोड़ी गई खदानों से सबसे अधिक अबैध उत्खनन कराया जा रहा है। उत्तरप्रदेश के एक ठेकेदार को पूरे जिले की रेत खदाने देने के कारण टीकमगढ़ जिला एवं छतरपुर जिले के बड़े हिस्से में रेत पर इस ठेकेदार का एकाधिकार हो गया। वहीं छतरपुर जिले की धसान की खदानों में भी वह मनमानी कर रहा है। उधर पेटी कांट्रेक्टरों को खदानें दे देने के कारण बिचैलिये सक्रिय हो गए है। जिसका परिणाम यह हुआ कि रेत के दाम आसमान पर पहुंच गए। दो साल पहले तक जहां ट्रेक्टर की रायल्टी 250 रूपए लगती थी वही अब यह ठेकेदार 700 रूपये ले रहा है। पिछले साल तक एक छोटा ट्रक रेत खदान पर मय पिटपास और लेबर चार्ज सहित चार हजार रूपये में मिलता था वहीं अब छह हजार सात सौ रूपये खदान पर ही पड़ रहा है। शहर तक आते आते यह रेत नौ से दस हजार रूपये की पड रही है। इससे गरीबों को अब अपनी झोपड़ी से पक्का मकान बनाने के लिये सिर्फ सपना ही देखना रह गया है। शिवराज सरकार भले ही भाजपा को गरीबों की सरकार बताती है परन्तु उनके सरकार के नौकरशाह शिवराज सरकार की लुटिया डुबोने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है।