भारत वर्ष में आज अशांति का माहोल है!सारा देश जल रहा है!मेरी बात से सहमत कम लोग ही होंगे !लेकिन ये सच है कि सारा देश जल रहा है! हम ने पढ़ा है कि उत्तर से ले कर दक्षिण तक माने कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूर्व से लेकर पश्चिम तक सारा भारत एक है!तो अज अगर उत्तर में कश्मीर में अशांति है मध्य में छत्तीसगढ़ में नक्सालवाद चरम पर है पूर्व में भी अलगाववाद पनप कर फैल रहा है! तो कह सकते है कि सारा भारत जल रहा है! लेकिन क्या देश के लोग यह समस्या का आने वाला रूप देख प रहे है? कुआ हम जानते है कि जो अज ये उत्तर पूर्व या खी और हो रहा है कल कही भी हो सकता है! हम नही जानते न ही जानना चाहते!क्यों कि हम ने देश का ठेका एक सरकार के रूप में किसी पार्टी को दे रखा है ! सभी राजनीतिक दल ही इसके ठेकेदार है!हमने वोट दे दिया अब वो जाने उनका देश जाने! ऐसा सोचने वाले लोग भी है और विडंबना ही है कि अधिक संख्या में है!इसी आदत कि वजह से आज हम सुरक्षित नही है! वोट देना हमारा अधिकार है लेकिन कर्त्तव्य क्या है कोई नही जनता!वोट दे कर हमने अपना प्रतिनिधि को चुना लेकिन वो केसे काम करे यह सब बताने का अधिकार और कर्त्तव्य भी आम मतदाता का है! कश्मीर से शुरू करे तो देखने में आता है कि वहा हालात बिगाड़े गये है! आग लगाई गयी है!जम्मू और कश्मीर एक राज्य है! लेह लाद्दक्ह भी इसी में आता है! सीमाए पाकिस्तान और चीन से लगती है हर तरह से संवेदनशील है ये प्रदेश! इसके लिए केंद्र ने क्या नीति बनाई समझ से परे है! थोडा इतिहास में जाए तो कश्मीर पर पाकिस्तान कि नज़र बराबर लगी है १९४८ से युद्ध का सफ़र शुरू किया पाकिस्तान ने और १९९९ तक चला! आगे थमेगा इसकी कोई उम्मीद नही है! लेकिन इस सब में एक तरह से हार भारत कि हुई क्यों कि भारत कि कुछ भूमि पाकिस्तान ने कब्ज़ा ली और युद्ध विराम नीति के कारण कब्ज़ा कर बैठ गये! फिर कश्मीर में अलगाव वाद को हवा देने का काम कांग्रेस ने भी किया .! जब जम्मू और कश्मीर भारत का अंग है तो अलग कानून ,निशान झंडा देने का औचित्य क्या है? कश्मीर से कश्मीरी पंडितो को भगा दिया तो कोई कुछ नही बोला! कश्मीर कि घटी को हिन्दू विहीन किया गया! कोई नही बोला!किसी ने न्निन्दा करने कि हिम्मत दिखाई हो तो अलग बात नही तो झूठी धर्मनिरपेक्षता का नाच दिखाया गया!आज अलगाव वाद चरम पर है और कौन है इसके पीछे ये भी पता है जिसे पता नही है उसके लिए पिछले दिने मीडिया ने खुलासा भी किया है!सभी मानवाधिकार आयोग,ये आयोग वो आयोग, यह लेखक वो सामाजिक कार्यकर्ता चुप है!कही उनकी छदम धर्मनिरपेक्षता को ठेस न पहुंचे!रे मेरे देश के वीर सपूत दिन रात विषम परिस्थितियों में देश कि रक्षा कर रहे है!और जिसके लिए यह सब हो रहा है वो फौजी भाइयो पर पत्थर बरसा रहा है! कहा है फौजी भाइयो का मानवाधिकार?
सरकार जानती है लेकिन कही कोई खास नाराज़ न हो जाए ऐसी नीति है...
मेरे फौजी भाई मरे तो मरे लेकिन वोट बैंक ख़राब न हो जाए कही! ऐसी चिंता सरकार को खाए जा रही है!मुसलमान नाराज़ हो जाएगा!क्यों नाराज़ होगा? नही नाराज़ होगा इस देश का हर एक देशभक्त नागरिक कभी नाराज़ नही होगा, मुस्लिम खुश होगा कि उनके इस्लाम को बदनाम करने वाले तत्वों को सजा मिलेगी! लेकिन इस देश में एक वर्ग ऐसा है जो मुस्लिम को इकठा रखता है! केसे इकट्ठा रखता है ...जो भी देश द्रोही है उसको जोड़ के रखता है! कोई भी आदमी जिस भी समुदाय से है देशद्रोही है तो वो कोई भी धर्म का नही है! ऐसे में तुष्टिकरण कि नीति क्या है ये सोच?
कश्मीर में कार्यवाही से इतना डर क्यों!क्यों ऐसा माहोल बनाते है कि मुस्लिम पर कार्यवाही हो रही है१ वहा एक देशद्रोही पर कार्यवाही करनी है,चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम या कोई और!!!१
मुस्लिम समुदाय को परोक्ष रूप से क्यों घसीटा जाता है?ये एक वोट बैंक कि साजिश है!
नक्सालवाद कि समस्या क्यों है? क्या बात है कि लोग आम ज़िन्दगी को छोड़ कर बन्दूक और गोली से खेल रहा है!क्या दे रही है सरकार, जो इनको इतना बुरा लग रहा है कि बन्दूक उठाने को मजबूर है? यदि नही है तो मतलब वो आतंकवादी है! यदि ऐसा है तो क्या सरकार इस से निपटने में असमर्थ है? न आतंकवाद से निपटा जाया जा रहा है न नाक्सालवाद से??? तो क्या आन्तरिक सुरक्षा? गोली मारे तो मानवाधिकार आगर आता है.यदि सी आर पी एफ्फ़ के जवान को मर दे नक्सली तो कुछ नही! सरकार बताए कहा गलती हुई? क्या सुधार कि उम्मीद है! नाक्सालियो से बात नही कि जाएगी! तो क्या जवान फेंके जाएँगे उनके सामने ?
नीति नही है कोई तो बड़ी बड़ी देंगे क्यों हांकी जा रही है कोन बेवकूफ बन रहा है! आम आदमी ! यह वो कांग्रेस का आम आदमी नही है ये भारत वर्ष का आम आदमी है जो वोट दे कर उम्मीद कि नजरो से देखता है! ये आम आदमी इस देश का नागरिक है! अज भारत जल रहा है इसके लिए कई तत्व जिम्मेवार है! लेकिन ये वक़्त दोषारोपण करने का नही बल्कि दोष को सुधरने का है!! दोष सुधारे, आम जनता कि उम्मीदों को पहचाना जाए कि वो क्या छह रहा है! देह हित देखे कि देश कहा जा रहा है१ अब बहुत हो गयी नौटंकी! युवा ध्यान दे कि उनका भविष्य डूब रहा है! इसे बचाने कोन आएगा! हमें खुद हे जंग क मैदान में कूदना होगा! सरकार सुधार करे ..नौटंकी राजनीतिज्ञ सुधार करे नीति निर्धारक सुधार केरे, ये चेतावनी है युवा आवाहन है!
हम उबलते हैं,तो भूचाल उबल जाते हैं .
हम मचलते हैं,तो तूफ़ान मचल जाते हैं .
हमको बदलने की कोशिश मत करना ,
क्योंकि हम बदलते हैं तो इतिहास बदल जाते हैं
वन्देमातरम