रविवार, 19 मई, 2019
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श्मसान घाट में घमासान
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श्रीगंगानगर। बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि इंसान यदि महीने में एकाध बार श्मसान घाट चला जाए तो वो दुनिया के मौह-माया और बंधनों से ऊपर उठ जाता है, लेकिन श्रीगंगानगर में हुई एक बेहद शर्मनाक घटना ने इस मिथक को चकनाचूर कर दिया है। शहर के कथित वरिष्ठ या यूं कहें कि भ्रष्ट लोगों के बीच कल्याण भूमि में ऐसा घमासान हुआ कि उनकी हरकतें देख मुर्दे भी फिर से मरने को तैयार हो जाए। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से शहर में ये चर्चा जोरों पर थी कि कल्याण भूमि में अंतिम संस्कार के लिए लकडिय़ां नहीं दी जाती। इसी तरह अन्य कारणों के चलते आज एक बैठक कल्याण भूमि परिसर में बुलाई गई थी, जिसमें कुछ लोगों की मांग थी कि उन्हें संचालन समिति में शामिल किया जाए। बताया जाता है कि आज इस बैठक में शामिल होने के लिए दो पक्ष पहुंच गए और उनमें आपसी द्वेष इतना बढ़ा कि उनमें जमकर मारपीट हुई। घटना के बारे में सुनते ही शहर के प्रबुद्धजन शर्मसार हुए बिना नहीं रहे, तो अन्य तबकों में भी इस घटना की कड़ी निंदा की गई। हालांकि कुछ लोगों ने इस मामले को राजनीतिक तूल देते हुए आंदोलन का निर्णय भी लिया है तथा रस्साकसी जारी है। आरोप है कि ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय महीपाल व गोपाल खारीवाल के साथ चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों ने मारपीट की। सूत्रों के अनुसार कल्याण भूमि के कुछ मुद्दों को लेकर चैम्बर ऑफ कॉमर्स की ओर से श्मसान घाट में कल्याण भूमि विकास समिति के सदस्यों की बैठक बुलाई गई थी। प्राथमिक स्तर पर बैठक सही दिशा में चल रही थी और बैठक में शामिल लोग चर्चा कर रहे थे कि शहर से बाहर के लोगों को लकडिय़ां नहीं दी जाती। उनका मानना है कि गरीब लोगों को लकडि़य़ां नहीं मिलने से वे संस्कार तक नहीं करवा पाते। साथ ही चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी आरोप जड़ रहे थे कि कल्याण भूमि विकास समिति पर महज कुछ लोगों का कब्जा है, जो जायज नहीं है और इसी लिए अन्य लोगों को भी शामिल करना चाहिए। उधर, कल्याण भूमि विकास समिति का तर्क था कि शहर से बाहर लकड़ी की मांग को पूरा नहीं किया जा सकता क्योंकि समिति केवल शहर के शवों के संस्कार के लिए ही लकडिय़ां खरीद करती है। इसी दौरान चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से आरोप लगाया गया कि समिति के सदस्य लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करते हैं तथा वे अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने की बजाए स्थानीय गड्डों में फैंक देते हैं। सूत्रों के अनुसार इस बात से भड़के समिति के सदस्य ने बैठक में शामिल कुछ लोगों को 'भूखा-नंगाÓ कर दिया और इसी के साथ ही विवाद बढ़ गया। इसी बीच कुछ लोगों ने समिति के सदस्य व ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय महीपाल के साथ मारपीट शुरू कर दी। मारपीट से आहत उक्त पदाधिकारी ने इसकी जानकारी धानमंडी के व्यापारियों को दी, जिस पर व्यापारियों ने एक बैठक बुलाकर आंदोलन का बिगुल बजा दिया। इस मामले में व्यापारियों ने चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी तेजेंद्रपाल टिम्मा पर गंभीर आरोप जड़े हैं। बताया जाता है कि बैठक में कुछ नेता भी शामिल थे, जिनमें विधायकी का चुनाव हार चुके महेश पेड़ीवाल, राजकुमार गौड़ भी हैं। सूत्र बताते हैं कि झगड़े के बाद कुछ लोगों ने मामले को निपटाने का प्रयास किया लेकिन कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक रंग देते हुए और अधिक बढ़ा दिया। हैरत की बात है कि जिस वक्त ये लोग झगड़ा कर रहे थे उसी दौरान श्मसान घाट में एसीबी के वरिष्ठ अधिकारी दलीप जाखड़ के पिता का अंतिम संस्कार किया जा रहा था।
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