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आखिर क्यों भूल गए हम शहीदों की कुर्बानी
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भारत के शहीदों को नमन

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पहले मुग़ल शासन फिर अंग्रेजी राज और आज अपनों का ही साम्राज्य | बस यही गाथा है भारत के इतिहास की | सेंकडों वर्षों तक देश की आजादी की लड़ाई क्या थी क्यों लड़ी गयी थी यह लड़ाई, आज का युवा इस इतिहास से ना केवल अपरिचित है बल्कि तोड़े मरोड़े इतिहास को साक्षी मानकर भारतीय संस्कृति की मूल से पृथक प्रतिमा बनाये बैठा है |

कहे गए शव्द बड़े अजीब जरूर लग रहे होंगे पर सच्चाई यही है कि हमारे देश के इतिहास को तोडना मरोड़ना ही राजनीति का असली मकसद है | देश के लाखों लोग जहाँ सेंकडों वर्षों से आजादी नाम के मकसद को लेकर अपनी जाने गंवाते रहे हैं वहीं राजनीती की रोटी सेकने वाले लोगो ने हमेशा से ही अपना रंग दिखाया है | कहीं बयान बदले तो कहीं स्वार्थ के नाते पाले | सरकारें अड़ियल रवैये अख्तियार करती रही और लोग अपना विरोध दर्ज कराते रहे | कहीं भूख हड़तालें हुयीं तो कहीं उन्हें तुड़वाने के लिए विभिन्न तरीके अख्तियार किये जाते रहे |

सम्पूर्ण देश में जाती पांति कि कोई भावना नहीं होकर एकजुटता थी | सभी लोग एक होकर एक मकसद के लिए काम कर रहे थे | कम्युनिकेशन के माध्यम नहीं होने के बावजूद देश भर में खबरें आग की तरह अपना असर दिखाती थी | दिलों में सरफरोशी की तमन्ना लेकर चलने वाले लोगो के जज्बात थे की वक आने पर बता देंगे तुझे ऐ आसमां हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है | खीच कर लायी थी सबको आजादी की एक उम्मीद | एक सूत्र में एक सुर में एक लय गाने वाले थे भारत की आजादी के दीवाने |

नमन है उन दीवानो को जिनके आगे बड़ी बड़ी ताकतों ने अपना सर झुका दिया था | आज के ही दिन देश के तीन दीवानों को चोरी छुपे फांसी लगा दी गयी थी | १० सितम्बर १९३० को अंग्रेज सरकार ने अपने स्टार पर खुले आम भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को ताजीराते हिन्द की दफा ३०२ और विभिन्न धाराओं के तहत २४ मार्च १९३१ को फांसी की सजा सुनाई थी जिसे २३ मार्च १९३१ को समय से पूर्व ही अमल में लाकर भारत की आजादी को हमेशा हमेशा के लिए समाप्त कर दिया था | आज भी याद है वो दिन जब २३ मार्च को भगत सिंह ने अपने भाई को देश की आजादी का अर्थ समझाया था तब भी वे जानते थे कि अंग्रेज सरकार अपने नियमों को हमेशा ताक पर रखती है और कानूनों को जरूरत के हिसाब से बदल लिया जता है | चंद्रशेखर आजाद को खुले आम अंग्रेज सिपाहियों ने मुठभेड़ में मार गिराया था | अंग्रेज सरकार की तो औकात ही क्या थी ये तो हमारे राजनीति का निर्धारण करने वाले लोगो की छूट ही थी की चुपचाप देश के तीन नौजवानों को फांसी दे दी गयी और देश के सभी गांधी वादी आंदोलनकारियों ने उन्हें मूक समर्थन दिया | फांसी के बाद सभी चुप होकर अंग्रेज सरकार की गुलामी कर रहे थे | एक भी नेता या आंदोलनकारी ऐसा नहीं था जिसने भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु की ह्त्या किये जाने पर दोषियों को सजा की मांग की हो | राजनीति के खिलाडियों ने ऐसा खेल खेल कि भारत के लोग भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बाद आजादी का अर्थ ही भूल जाएँ | आरोप है कि राजनीती के माहिरों ने खुले आम भारत माँ के लालों के खिलाफ केस और सजा का समर्थन किया और उनकी ह्त्या के बाद भगत सिंह सुखदेव राजगुरु का नाम फाइलों में दबा दिया गया | राजनीतिकारों ने खुलेआम भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के इंकलाब जिंदाबाद के नारों को जमकर भुनाया | इसी दबाब के चलते भारत की सत्ता का हस्तांतरण हुआ और विभिन्न समझौतों के तहत उम्दा किस्म के रणनीति और राजनीतिकारों ने भारत और पकिस्तान का निर्माण करते हुए अपनी अपनी सरकारें गठित कर ली गयीं

देश आजाद हो गया सरकार बन गयीं लेकिन भूल गए तो आजादी के मायनों को | भूल गए तो आजादी के नीव रखने वाले भारत माँ के लालों को जिनकी वजह से अंग्रेज सरकार का सम्पूर्ण भारत के विभिन्न हिस्सों से पूर्णतया पतन हो चुका था | अब अंग्रेजों के पास सत्ता के हस्तांतरण और अपने एजेंटों का निर्धारण करना तथा अपने कानूनों के तहत उनको बाध्य करना ही अंतिम रास्ता था | और इसी रास्ते पर चलते हुए उन्होंने भारत को आजादी प्रदान की थी | किसी को प्रधान मंत्री बनाया गया किसी को राष्ट्रपति और किसी को मंत्री | समय ने महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का खिताब तक दिला दिया लेकिन भगत सिंह को आज तक देश के मुजरिम के खिताब से ही नबाजा गया है |

यह सच्चाई ही नहीं अपितु हकीकत है कि भारत में आजतक भगत सिंह को शहीद का दर्जा नहीं दिया गया भले ही जनता आज भी उन्ही शहीदेआजम के नाम से पुकारती हो | आज जरूरत सरकार की नहीं हमारी है | हमें पहचानना होगा कि आखिर वो क्या कारण था जिसकी वजह से सैनकों वर्षों तक लाखों लोगों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए | कितने महान थे ये वीर जिन्होंने हँसते हँसते देश के लिए फांसी के तख्ते को चूम लिया | कितनी महान थी वो माँ जिन्होंने हँसते हँसते अपने पुत्रों को देश के लिए न्योछावर कर दिया | कितनी महान है यह भारत माँ जहाँ लाखों लोगों के रक्त से विकास के बीज को निर्माण की गति दी गयी | क्या खोखले दावे और झूठे वादे ही भारत का आधार हैं या किसी और वजह से भारत की आजादी का संग्राम लड़ा गया था |

आज जरूरत है तो एक बड़े बदलाव की जिसके चलते ना केवल हमारे देश के युवा बल्कि देश का हर नागरिक आजादी के मायने समझे | हमें समझना होगा कि क्यों हमारे भविष्य और वरतमान के साथ खिलवाड़ किया गया तथा किन उद्देश्यों के साथ भारत के इतिहास के साथ छेड़छाड़ करते हुए आजादी के मायने ही बदल दिए गए है | क्या अर्थ है गड़तंत्र और स्वतंत्र का | क्यों चुनी जा रही हैं ये सरकारें | क्यों सभी दौड़ रहे हैं कुर्सी के पीछे | कहाँ से आ रहा है करोड़ों रुपया | कैसे हो रही है रुपयों की हेरा फेरी | कौन बेच रहा है देश की अस्मत | कैसे महँगा हो गया अंग्रेजों का डॉलर | क्यों भारत लगातार पिछड़ रहा है | कैसे रोका जाये इन समस्याओं को | क्या समाधान होगा भविष्य का | क्यों भूखा मर रहा है किसान | कैसे कर्जे से दबा किसान अपने जीवन को जीने के लिए मज़बूर है | कौन लेगा इन सब की जिम्मेदारी | क्या नए मंत्री और सरकार आम आदमी की जरूरतों को समझते हैं | कैसे पूर्ण होगा विकसित भारत का सपना | इन सवालों के जबाब ढूंढना ही हर भारतीय का धर्म और कर्त्तव्य है |

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