रविवार, 5 सितम्बर, 2010
कलेक्टर कौन होता है संयुक्त कलेक्टर को प्रभार देने वाला
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 कलेक्टर कौन होता है संयुक्त कलेक्टर को प्रभार देने वाला
छतरपुर(रवि गुप्ता)। मध्यप्रदेश शासन के आदिमजाति मंत्रियों का पूरा खर्चा उठाने वाले एक अदने से नौकरशाह लालजी राम मीना जिला संयोजक आदिमजाति कल्याण विभाग छतरपुर की हद उस समय पार हो गई जब उसे कलेक्टर ने नवीन आदेश के तहत अपनी ज्वाइंनिग देने को कहा और प्रभारी संयुक्त कलेक्टर से अपना प्रभार लेने को कहा। इस पर मीना ने उल्टे ही संयुक्त कलेक्टर श्री बालम्बे को अपना नवीन प्रभार लेने के लिये एक पत्र लिखकर कहा कि संयुक्त कलेक्टर श्री बालिम्बे को प्रभार देने का प्रश्न नही उठता है। यह पत्र तब लिखा गया जब श्री मीना ने जिला आदिमजाति के बिल ट्रेजरी में डाले और जिला कोषालय अधिकारी ने उन बिलों पर यह कहकर रोक लगा दी कि पहले अपनी नवीन उपस्थिति का पत्र एवं कलेक्टर छतरपुर का आदेश लेकर आओ। इस पर श्री मीना ने पहले तो संयुक्त कलेक्टर श्री बालम्बे को खूब सुनाई और कहा कि आपको अधिकार नहीं है कि आप हमारे कार्यालय के बाबू को बुलवायंे। अगर दुबारा गल्ती की गई तो वह गल्ती माफ योग्य नहीं है। हालांकि संयुक्त कलेक्टर ऐसी वैसी कोई बात से इंकार करते है।

उल्लेखनीय है कि जब से जिला संयोजक के पद पर लालजी राम मीना आदिमजाति कल्याण विभाग में पदस्थ हुआ है तभी से अपनी मनमानी कर रहा था और छात्रावासों के छात्राओं के साथ बदसलूकी कर रहा था जिसकी शिकायतें कलेक्टर छतरपुर को मिलीं और उन्होने श्रीमीना को एक कारण बताओ नोटिस दे दिया। ताजुब बाली बात तो यह है कि कारण बताओ नोटिस में अपनी गल्ती छुपाते हुये उल्टा कलेक्टर पर ही दोष मढकर उन्हे ही दोषी बना दिया। इस पर कलेक्टर ने शासन को पत्र लिखकर श्री मीना के खिलाफ शिकायत की तो शासन ने श्री मीना का स्थानांतरण करते हुये भोपाल अटैच कर दिया। इस पर आदिमजाति के दोनो मंत्रियों का पूरा खर्चा उठाने का वास्ता देकर मंत्रियों से पहले कलेक्टर पर दबाब बनवाया जब मामला बनता नहीं देखा तो हाईकोर्ट की शरण में जाकर स्टे ले लिया। इस स्टे को हाईकोर्ट में 23 जुलाई को बैकिट कर अपना फैसला दिया कि श्री मीना का स्थानांतरण प्रशासनिक कार्रवाई है। इस पर कलेक्टर ने 24 जुलाई को श्री मीना को भोपाल के लिये रिलीब कर दिया। तथा संयुक्त कलेक्टर श्री बालम्बे को जिला आदिमजाति विभाग का प्रभार दे दिया। श्री मीना ने अपने दोनो मंत्रियों के यहां फिर से गुहार लगाई और 24 जुलाई को ही भोपाल से छतरपुर का नवीन पदस्थापना करवा ली। इस नवीन आदेश के साथ श्री मीना ने नवीन उपस्थिति देना कलेक्टर को उचित नहीं समझा और सीधे आदिमजाति में काम करना शुरू कर दिया। जब श्री मीना ने जिला कोषालय में बिल भुगतान के लिये डाले तो बिल रोक दिये गये तब उसे बताया गया कि नवीन पदस्थापना उपस्थित एवं कलेक्टर को आदेश चाहिये है। इस पर उसने कलेक्टर को अपने से नीचे बताकर बिल पास करने जिला कोषालय अधिकारी को ही धमका दिया। हालांकि जिला कोषालय अधिकारी इस बात को इंकार कर रहे है। परन्तु सूत्र इस बात को सही बता रहे है।

ऐसा पहली बार शिवराज सरकार में हुआ है जब किसी नौकरशाह को हाईकोर्ट के स्टे आदेश को बैकिट पर उसे पुनः वही जिला 24 घंटे के भीतर नवीन आदेश के साथ दे दिया हो। इस कृत्य से आदिमजाति कल्याण विभाग के दोनो मंत्रियों पर तो उंगलियां तो उठ ही रहीं है साथ साथ शिवराज पर बेबसी का इल्जाम भी लगने लगा है।
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